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यूपी- बिहार के बेरोजगार युवकों ने की पीएम के नाम पर की ठगी

नयी  दिल्ली: यूपी बिहार के तीन बेरोज़गार युवकों ने पीएम के नाम से एक फर्ज़ी योजना का ऐलान किया। जिसके बाद  उन्होंने फर्ज़ी वेबसाइट बना कर लोगों से पैसे की ठगी करने लगे। मामला सामने आने पर दिल्ली पुलिस की साइबरसेल ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया। जो पीएम के नाम से एक फर्ज़ी योजना के तहत लोगों से पैसे की ठगी को अंजाम दे रहे थे।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक ने एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने ‘ प्रधानमंत्री शिशु विकास योजना ’ के नाम से फर्ज़ी योजना व वेबसाइट की शिकायत की थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरन्त एक टीम नियुक्त कर छानबीन शुरू कर दी। साइबर अपराध विभाग के उपायुक्त अन्येष रॉय और उनकी टीम ने छानबीन में नीरज पाण्डेय को बिहार और आदर्श यादव को उत्तर प्रदेश अयोध्या से गिरफ्तार किया। पूछताछ में नीरज और आदर्श ने बताया कि सुवेंद्र यादव नाम का व्यक्ति भी बिहार के पटना में प्रधानमंत्री शिशु विकास योजना के नाम से वेबसाइट चला रहा है। पुलिस ने सुवेंद्र यादव को भी बिहार से गिरफ्तार कर किया।

 15,000 लोगों को लगा चुके हैं चूना

पुलिस की पूछताछ में तीनों  ने बताया कि उन्होंने लगभग 15,000 लोगों से ठगी कर चुके हैं, उन्होंने आगे बताया कि वो लोगों से फर्ज़ी योजना के तहत बच्चों का बीमा कर अभिभावकों को कहते थे कि इस योजना के अनुसार भारत सरकार उनके बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा का ज़िम्मा उठाएगी। इस योजना में  रजिस्ट्रेशन के नाम पर प्रति बच्चा 250 रुपये लेते थे, गिरोह ने बताया कि अब तक उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, मिजोरम, गोवा, अरुणाचल प्रदेश आदि 24 राज्यों व यूनियन टेरिटरीज में सक्रिय हैं।

ठगी को बड़ा करने की थी योजना

गिरोह के तीनों सदस्यों ने बताया कि वे इस ठगी को बड़ा बनाने की योजना पर काम कर रहे थें। जिसके लिए उन्होंने हर राज्य में एक डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर और हर ग्राम पंचायत में एक एजेंट के भी नियुक्ति की थी, मिलने वाले पैसों में 50 रूपये एजेंट को और 100 रुपयें डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर को जाते थें। अभी तक यह गिरोह 24 राज्यों में सक्रिय था। तथा उनकी योजना और अधिक बच्चों को जोड़ने की थी।

बच्चों का डाटा एकत्रित कर बेचने की थी योजना

तीनों आरोपियों ने चौंका देने वाला खुलासा किया। पुलिस की तफ्तीश में ये बात सामने आई कि गिरोह के तीनों सदस्य बच्चों के डाटा एकत्रित कर अस्पतालों एवं अन्य संस्थानों को बेच कर पैसा कमानें की भी योजना बना रहे थें।

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