राजस्थान कैबिनेट की बैठक ख़त्म, राज्यपाल को सत्र बुलाने के लिए फिर भेजा प्रस्ताव

जयपुर : राजस्थान में जारी राजनीतिक उठा-पटक के बीच मंगलवार को एक बार फिर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक बुलाई गई. जिसमें राज्यपाल को तीसरी बार विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा गया. प्रस्ताव में राज्यपाल से अपील की गई थी की उन्हें कैबिनेट द्वारा दी सलाह माननी चाहिए.

CRPF की टुकड़ी भेजकर हमें जेल में डाल दें

बैठक ख़त्म होने के बाद राज्य सरकार में मंत्री प्रताप सिंह, हरीश चौधरी द्वारा दिए गए बयान में कहा गया ने कहा कि हमने तीसरी बार विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए प्रस्ताव भेजा है, अगर नहीं माना गया तो एक बार फिर कैबिनेट बुलाकर प्रस्ताव भेजेंगे. फिर भी न मानने पर हम केंद्र सरकार से कहेंगे कि वे CRPF की टुकड़ी भेजकर हमें जेल में डाल दें, जब राजस्थान में चुनाव होंगे तो हम फिर जीतकर आएंगे.

सत्र बुलाने की कार्यवाही करें, लेकिन तीन शर्तों का रखें ध्‍यान

वहीँ राजभवन की ओर से कहा गया है कि राज्यपाल का विधानसभा का सत्र न बुलाने की इच्छा नहीं है. वो सत्र बुलाने की कार्यवाही शुरू करें, लेकिन तीन शर्तों का खास ध्‍यान रखें. राज्यपाल की सलाह है कि विधानसभा सत्र के लिए 21 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए. अगर विश्वास मत (Confidence Motion) की नौबत आती है तो इसका लाइव प्रसारण हो और कोरोना संक्रमण से बचने के लिए 200 विधायकों की सोशल डिस्टेंसिंग के इंतज़ामों का ध्यान रखा जाए. इस बीच, पायलट कैंप और गहलोत गुट के बीच जुबानी जंग का दौर भी देखने को मिला.

अशोक गुट के 10 से 15 विधायक हमारे संपर्क में

इसी बीच अब सचिन पायलट गुट के एक विधायक ने बड़ा दावा किया है. पायलट के समर्थक एमएलए हेमाराम चौधरी ने कहा है कि गहलोत गुट के 10 से 15 विधायक उन लोगों के संपर्क में हैं. हेमाराम चौधरी ने कहा,” अशोक गहलोत के गुट के 10 से 15 विधायक हमारे संपर्क में हैं. वह कह रहे हैं कि वह हमारे साथ आ जाएंगे जैसे ही उन्हें फ्री छोड़ा जाएगा. जैसे ही गहलोत उन लोगों पर से प्रतिबंध हटाएंगे. जल्द साफ हो जाएगा कि कितने एमएलए उनके साथ रहेंगे.”

आपको बता दें कि इससे पहले भी दो बार कैबिनेट की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन राज्यपाल कलराज मिश्र ने इन्हें स्वीकार नहीं किया है. राज्यपाल की ओर से कोरोना संकट, विधानसभा में व्यवस्था और कुछ अन्य सवाल उठाए गए हैं. यही कारण है कि राज्यपाल और राज्य सरकार में अनबन की स्थिति है.

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