दुश्मन के हर मंसूबे होंगे फेल,आ रहा है Rafale

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना में पांच राफेल फाइटर जेट शामिल होने जा रहे हैं। जो फ्रांस से उड़ान भर चुके हैं। राफेल को फ्रांस से सात भारतीय पायलट उड़ाकर अंबाला एयरबेस ला रहे हैं। फ्रांस से भारत आते समय पांचों फाइटर प्लेन को 28 जुलाई को यूएई के अल डाफरा एयरबेस पर उतारा जाएगा। अल डाफरा एयरबेस की जिम्मेदारी फ्रांस एयरफोर्स के पास है। यहां पर राफेल विमानों की चेकिंग और फ्यूल भरा जाएगा। इसके बाद पांचों राफेल विमान 29 जुलाई की सुबह भारत पहुंचेंगे।

 मिशन के लिए तैयार 5 राफेल विमान

एक हफ्ते के अंदर ही करीब 5 राफेल विमानों को किसी भी मिशन के लिए तैयार कर लिया जाएगा। इन फाइटर जेट को उड़ाने के लिए कुल 12 पायलटों को ट्रेनिंग दी गई है। दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों और सेमी स्‍टील्‍थ तकनीक से लैस इन विमानों के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से देश की सामरिक शक्ति में भारी इजाफा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत के दोनों ही पड़ोसी देशों यानी चीन और पाकिस्तान के पास ये खतरनाक फाइटर जेट नहीं है।

हवा से हवा में मार करने की क्षमता 

भारत आने वाले राफेल फाइटर जेट्स में दुनिया की सबसे आधुनिक हवा से हवा में मार करने वाली मीटिआर मिसाइल भी लगी है। राफेल के पहले बेड़े को 17 गोल्डन एरो स्क्वॉड्रन के पायलट उड़ाएंगे। इनकी ट्रेनिंग भी फ्रांस में पूरी हो चुकी है। वायुसेना ने एक अन्य घातक हथियार का ऑर्डर दिया है और ये यह हथियार है HAMMER यानी हाइली एजाइल मॉड्यूलर म्यूनिशन एक्सटेंडेड रेंज। हवा से सतह पर मार करने वाली वाली यह मिसाइल फ्रांस से ही मंगाई जा रही है।

फ्रांस भारत के कहने पर यह घातक मिसाइल जल्द देने पर सहमत हो गया है। राफेल से फायर होने के बाद इस मिसाइल की मारक क्षमता काफी बढ़ जाती है। इसका निशाना अचूक है। राफेल के हैमर मिसाइल से लैस होने के बाद भारत को बड़ी बढ़त हासिल हो जाएगी। यह मिसाइल किसी भी प्रकार के बंकर या सख्त सतह को पल में मटियामेट करने की ताकत रखता है। यह किसी भी स्थिति में बेहद उपयोगी है। बेहद कठिन पूर्वी लद्दाख जैसे इलाकों में इसकी मारक क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ती है।

इस घातक हथियार की मारक क्षमता बड़ी तगड़ी है। यह 20 किलोमीटर से 70 किलोमीटर की दूरी तक अचूक निशाना लगाने में माहिर है। जिस लड़ाकू विमान से हैमर को फायर किया जाता है वह उसकी मारक दूरी के कारण ही दुश्मन की एयर डिफेंस से बचने में सफल रहता है। क्योंकि दूरी के कारण लड़ाकू विमान दुश्मन के रेडार पर नजर नहीं आता है।


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