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राष्ट्रपति की ऐतिहासिक अयोध्या यात्रा, बोले- रामकथा की लोकप्रियता भारत में ही नहीं बल्कि विश्वव्यापी है

Ayodhya. राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द अपने चार दिवसीय दौरे पर यूपी आए हैं। वहीं दौरे के आखिरी दिन वह रामनगरी अयोध्या में हैं। वह लखनऊ से प्रेसीडेंशियल स्पेशल ट्रेन से अयोध्या पहुंचे हैं। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ ने उनकी अगवानी की। उनके रामनगरी में प्रथम आगमन को ऐतिहासिक बनाने की पूरी तैयारी की गई है। बता दें कि ऐसा पहली बार है, जब कोई राष्ट्रपति रामलला का दर्शन करने के लिए आए हैं।

वहीं अयोध्या में रामकथा पार्क के उद्घाटन के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, आप सब के बीच अयोध्या में इस रामकथा पार्क में आकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। हम सब रामकथा के महत्व के बारे में जानते हैं। यह कहा जा सकता है कि भारतीय जीवन मूल्यों के आर्दश और उपदेश रामायण में समाहित है।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, रामकथा की लोकप्रियता भारत में ही नहीं बल्कि विश्वव्यापी है। उत्तर भारत में गोस्वामी तुलसीदास की रामचरित-मानस, भारत के पूर्वी हिस्से में कृत्तिवास रामायण, दक्षिण में कंबन रामायण जैसे रामकथा के अनेक पठनीय रूप प्रचलित हैं। विश्व के अनेक देशों में रामकथा की प्रस्तुति की जाती है। इन्डोनेशिया के बाली द्वीप की रामलीला विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मालदीव, मारिशस, त्रिनिदाद व टोबेगो, नेपाल, कंबोडिया और सूरीनाम सहित अनेक देशों में प्रवासी भारतीयों ने रामकथा व रामलीला को जीवंत बनाए रखा है।

एक भेद-भाव-मुक्त समाज व प्रेम की दिव्यता का अद्भुत उदाहरण है

राष्ट्रपति ने कहा, मैं कामना करता हूं कि जिस प्रकार रामराज्य में सभी लोग दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्त थे उसी प्रकार हमारे सभी देशवासी सुखमय जीवन व्यतीत करेंगे। रामायण में राम-भक्त शबरी का प्रसंग सामाजिक समरसता का अनुपम संदेश देता है। महान तपस्वी मतंग मुनि की शिष्या शबरी और प्रभु राम का मिलन, एक भेद-भाव-मुक्त समाज व प्रेम की दिव्यता का अद्भुत उदाहरण है।

राष्ट्रपति ने कहा, मैं तो समझता हूं कि मेरे परिवार में जब मेरे माता-पिता और बुजुर्गों ने मेरा नाम-करण किया होगा तब उन सब में भी संभवतः रामकथा और प्रभु राम के प्रति वही श्रद्धा और अनुराग का भाव रहा होगा जो सामान्य लोकमानस में देखा जाता है। रामायण में राम-भक्त शबरी का प्रसंग सामाजिक समरसता का अनुपम संदेश देता है। महान तपस्वी मतंग मुनि की शिष्या शबरी और प्रभु राम का मिलन, एक भेद-भाव-मुक्त समाज व प्रेम की दिव्यता का अद्भुत उदाहरण है।

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