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16 करोड़ रुपये का इंजेक्शन और लाखों की दुआएं, लेकिन फिर भी वेदिका की थमी सांसे

नई दिल्ली। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए टाइप ई-1) से जूझ रही 11 महीने की वेदिका शिंदे अब हमारे बीच नहीं रही। डेढ़ महीने पहले वेदिका को इलाज के लिए जरूरी 16 करोड़ रुपये का इंजेक्शन दिया गया था, लेकिन इससे भी वेदिका की जान नहीं बच सकी और रविवार रात उसकी सांसे थम गई। वेदिका के पिता सौरभ शिंदे ने बताया कि इंजेक्शन देने के बाद उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा था, लेकिन रविवार (1 अगस्त) को उसका ऑक्सीजन लेवल अचानक गिर गया और उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी, तभी उसे पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इस दौरान ही उसकी मौत हो गई।

बता दें कि वेदिका बचाने में पूरा देश लगा हुआ था। मासूम वेदिका के इलाज के लिए देशभर से 16 करोड़ रुपयों की आर्थिक मदद जुटाई गई थी। वेदिका का इलाज करवाने के लिए अमेरिका से 16 करोड़ रुपये का इंजेक्शन मंगवाया गया था। इस दौरान केंद्र सरकार ने इस इंजेक्शन के आयात शुल्क को माफ कर दिया था।

परिवार को फरवरी के अंत में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी बीमारी का पता चला था, जिसे लेकर परिवार वालों ने वेदिका का इलाज पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में शुरू कराया था। साथ ही पूरे देश से आर्थिक मांगी गई थी। इसके बाद 15 जून को 16 करोड़ का इंजेक्शन लगाया गया और 16 जून को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

इस इंजेक्शन के लगने के बाद वेदिका की हालत में काफी सुधार हुआ था। इस बीमारी को लेकर डॉक्टर अष्पाक बांगी ने बताया कि इस बीमारी से पीड़ित होने की वजह से वेदिका की मसल काफ़ी कमज़ोर हो चुकी थी, जिसके चलते उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी, उसे इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल करवाया गया, लेकिन दुर्भाग्य से उसकी मौत हो गई।

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