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होम आइसोलेशन को की गई स्टडी में दावा, सबसे ज्यादा ठीक हो रहे मरीज

देश में कोरोना के आंकड़ें प्रतिदिन तीन लाख से अधिक आ रहे हैं। कोरोना की ये दूसरी लहर और अधिक घातक साबित हो रही। राज्यों की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई है। अस्पतालों में बेड और मेडिकल ऑक्सीजन की किल्लत है। मरीज अस्पताल के बार ही दम तोड़ दे रहे हैं। ऐसे में अधिकतर मरीज होम आइसोलेशन का विकल्प चुन रहे हैं। होम आइसोलेशन में मरीज ठीक भी हो रहे हैं।

Coronavirus | Health Ministry releases revised guidelines for home isolation  of mild COVID-19 cases - The Hindu

वहीं, होम आइसोलेशन को लेकर मेडिकल जर्नल द लैंसेट की स्टडी में दावा किया गया है कि Covid-19 के जो मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं होते हैं, उनमें इस वायरस का लॉन्ग टर्म गंभीर इफेक्ट कम होता है। इस स्टडी में कहा गया है कि अस्पताल में भर्ती ना होने वाले कोरोना के मरीजों में गंभीर दीर्घकालिक प्रभाव का खतरा कम होता है, हालांकि इन्हें बार-बार किसी ना किसी इंफेक्शन को लेकर डॉक्टर के पास जाने की जरूरत पड़ती है।

If COVID-19 Comes to Your Home, Learn to Isolate Safely

स्टडी में कहा गया है, ‘SARS-CoV-2 से संक्रमित होने के बाद जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की कम जरूरत पड़ती है, उनमें कोरोना से ठीक होने के बाद होने वाले गंभीर खतरे की संभावना बहुत कम होती है। हालांकि, ये लोग Covid-19 से जुड़ी किसी ना किसी समस्या को लेकर अस्पताल के चक्कर लगाते रहते हैं।

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