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DU में होंगे Open Book Exam, दिल्ली हाईकोर्ट ने दी इजाजत

नई दिल्ली : कोरोना वायरस के कहर के बीच एग्जाम को लेकर दुविधा में फंसे दिल्ली यूनिवर्सिटी के फाइनल ईयर के छात्र-छात्राओं के लिए अहम खबर आई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) को कुछ शर्तों के साथ फाइनल ईयर स्टूडेंटस् के लिए तय शेड्यूल पर ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा आयोजित करने की इजाजत दे दी है। वर्ष के पाठ्यक्रमों के लिए 10 अगस्त से ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा कराने के दिल्ली विश्वविद्यालय के फैसले को बरकरार रखा है।

हॉल में छात्रों के बीच सामाजिक दूरी का पालन करना है बेहद मुश्किल

दिल्ली हाईकोर्ट में बुधावार को डीयू प्रशासन ने कहा था कि ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा आयोजित करने का उद्देश्य छात्रों को कोविड-19 महामारी के समय में सामाजिक दूरी के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। डीयू प्रशासन ने कहा कि सामान्य परीक्षा आयोजित करके एक हॉल में छात्रों के बीच सामाजिक दूरी का पालन करना बेहद मुश्किल है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह के समक्ष डीयू की ओर से पेश वकील सचिन दत्ता ने कहा कि ओबीई के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, चूंकि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने ओबीई आयोजित करने की अनुमति दी है और इस संबंध में सुनवाई जारी है। उन्होंने को कोरोना महामारी के समय में सामाजिक दूरी के प्रावधानों को लागू करना सबसे ज्यादा जरूरी है। पीठ ने डीयू, यूजीसी, याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ता की दलीलें सुनने के बाद इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

परीक्षा में शामिल होने के लिए एक ईमेल होना भी होगा पर्याप्त

सुनवाई के दौरान डीयू के वकील ने कहा कि ओबीई में शामिल होने के लिए छात्रों को बेहद उच्च तकनीक की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा में शामिल होने के लिए एक ईमेल होना भी पर्याप्त होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो छात्र इस परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहते या परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते, उनके लिए सितंबर में सामान्य परीक्षा आयोजित की जाएगी। तब वे छात्र उस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही वकील ने कोर्ट से कहा कि परीक्षा के नतीजे भी जल्द घोषित किए जाएंगे, ताकि छात्रों को आगे की पढ़ाई करने के लिए परेशानी का सामना ना करना पड़े।

हस्तक्षेपकर्ता की ओर से पेश वकील शिवांकर शर्मा ने दलील दी कि ओबीई को बिना किसी आधार पर चुना गया है और यह किसी परीक्षा का माध्यम नहीं है। उन्होनें दावा किया कि यह फैसला मनमाना और बिना सोचे समझे लिया गया है, लिहाजा आबीई की अधिसूचना को रद्द करने के लिए निर्देश जाएं।

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