संसद में इस कलाकार पर बरसी जया, बोलीं – जिस थाली में खाया उसी में छेद

नई दिल्ली : अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में शुरूआती कार्रवाई के दौरान नेपोटिज़्म (Nepotism)  का मुद्दा काफी सुर्ख़ियों में रहा था. जिसमें कई बॉलीवुड कलाकारों के नाम सामने आए थे. इसी बीच सोमवार यानी 14 सितम्बर से संसद के मानसून सत्र की भी शुरुआत हो गई है. समाजवादी पार्टी की सांसद और अभिनेत्री जया बच्चन ने राज्यसभा में शून्य काल में नोटिस दिया है.

बॉलीवुड इंडस्ट्री को जानबूझकर बदनाम करने की साजिश

इस नोटिस में उन्होंने लिखा बॉलीवुड इंडस्ट्री को जानबूझकर बदनाम करने की साजिश की जा रही है. जिन लोगों ने फिल्म इंडस्ट्री में अपना नाम बनाया है उन्होंने इसे गटर बुलाया, मैं पूरी तरह इससे असहमत हूं. मैं उम्मीद करती हूं कि सरकार इन लोगों को बताए जिन्होंने इससे अपना नाम और प्रसिद्धि कमाई कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना बंद करें.

उन्होंने कहा कि मैं बहुत शर्मिंदा थी कि कल हमारे एक सांसद ने लोकसभा में फिल्म इंडस्ट्री के खिलाफ बोला, जो खुद इंडस्ट्री से हैं. ये शर्म की बात है, ‘जिस थाली में खाते हैं उसमें छेद करते हैं.’ गलत बात है, इंडस्ट्री को सरकार का समर्थन चाहिए.

इंडस्ट्री हर रोज 5 लाख लोगों को सीधा रोजगार देती है

उन्होंने कहा कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री हर रोज 5 लाख लोगों को सीधा रोजगार देती है. देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और चीजों से ध्यान हटाने के लिए हमारा इस्तेमाल किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर हमपर निशाना साधा जा रहा है. हमें सरकार से भी समर्थन नहीं मिल रहा है.

दरअसल, अभिनेता और भाजपा सांसद रवि किशन ने सत्र के पहले दिन सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया था और कहा था कि पाकिस्तान एवं चीन से मादक पदार्थों की तस्करी हो रही है तथा यह देश की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने की साजिश है. उन्होंने कहा कि हमारे फिल्म उद्योग में इसकी पैठ हो चुकी है और NCB इसकी जांच कर रही है.

वहीँ इस मामले को लेकर रविकिशन की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. उन्होंने कहा है कि मुझे जया जी से ये उम्मीद नहीं थी. मुझे लगा था कि मेरे कल के व्यक्तव्य पर जया जी आज समर्थन देंगी या तो उन्होंने मेरी बात सुनी ही नहीं. उनकी पार्टी अलग है, उनकी विचारधारा अलग है.

आपको बता दें कि संसद सत्र में इस बार प्रश्नकाल नहीं है. ऐसे में कुछ वक्त शून्य काल के लिए दिया गया है जहां पर सांसद चर्चा कर सकते हैं. इसके अलावा सांसदों के पास लिखित में सवाल पूछने का भी अधिकार होता है.

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