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नहीं रहे मुलायम सिंह के दाहिने हाथ अमर सिंह, सिंगापुर में ली अंतिम सांस

लखनऊ। राज्यसभा सांसद अमर सिंह का शनिवार को सिंगापुर के एक अस्पताल में लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया उनके निधन से सियासी गलियारों में शोक व्याप्त है पॉलिटिकल लीडर्स ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है बता दें कि अमर सिंह काफी समय से बीमार चल रहे थे उनका किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ था अमर सिंह का पिछले 6 महीने से सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था।

जब अमिताभ बच्चन से माफी भी मांगी

एक समय पर उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले अमर सिंह समाजवादी पार्टी के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव के करीबियों में शामिल थे। हाल ही में उन्होंने अमिताभ बच्चन से माफी भी मांगी थी। कभी समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव के दाहिने हाथ माने जाने वाले, उत्तरप्रदेश के कद्दावर नेता और समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह अपने शायराना अंदाज के कारण उत्‍तर प्रदेश की राजनीति में अपनी एक अलग ही पहचान रखते हैं। अमर सिंह का जन्म 27 जनवरी 1956 को अलीगढ़ में हुआ। इन्होंने कॉलेज शिक्षा सेंट जेवियर कॉलेज कोलकाता से ग्रहण की। अमर सिंह के परिवार में पत्नी पंकजा कुमारी सिंह और दो पुत्रियां हैं।

मुलायम सिंह यादव के दाहिने हाथ माने जाने वाले अमर सिंह

कभी समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव के दाहिने हाथ माने जाने वाले अमर सिंह पर पर भ्रष्टाचार के कई मामले भी चल रहे हैं। नवंबर 1996 में वे राज्यसभा के सदस्य मनोनीत किए गए हैं।  2008 में मनमोहन सरकार द्वारा विश्वास मत हासिल करने की बहस के दौरान भाजपा के तीन सांसदों ने संसद में एक करोड़ रुपए के नोटों की गड्‍डियां दिखाई थीं। सांसदों ने आरोप लगाया कि मनमोहन सरकार ने अमर सिंह के माध्यम से उनके वोट खरीदने की कोशिश की थी।

6 सितंबर 2011 को अमर सिंह भाजपा के दो सांसदों के साथ तिहाड़ जेल भेजे गए

6 सितंबर 2011 को अमर सिंह भाजपा के दो सांसदों के साथ तिहाड़ जेल भेजे गए। ‘कैश फॉर वोट’ कांड में अमर सिंह को जेल की हवा भी खानी पड़ी।  अभिनेता अमिताभ बच्चन के बुरे समय में अमर सिंह ने उनका बहुत साथ दिया। अमर सिंह ने इसके बाद राष्ट्रीय लोकमंच पार्टी की स्थापना की। 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय लोकमंच के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।  2014 में अमर सिंह ने राष्ट्रीय लोकदल से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन वह भी बुरी तरह हारे। उन्‍होंने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा भी की थी।

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