हो जाएं सावधान ! Corona का नया Variant मचा रहा तबाही

New Delhi. कोरोना वायरस का संक्रमण के बार फिर लोगों को डरा है। इसका नया वैरिएंट XE अन्य देशों के बाद भारत में भी दस्तक दे चुका है। इस नए वैरिएंट का केस मुंबई में मिला है। ऐसे में अब इस बात की आशंका है कि इसका संक्रमण देश के दूसरे इलाकों में फैल सकता है। XE वैरिएंट का पहला मामला जनवरी 2022 में यू.के. में पाया गया था।

इसके बाद से दुनिया में अब 600 से ज्यादा मामले पाए जा चुके हैं। XE वैरिएंट ओमीक्रॉन का म्यूटेशन रूप है। जो कि उसकी तुलना में कहीं ज्यादा संक्रामक है। अभी तक अच्छी बात यह है कि दुनिया में जितने लोग संक्रमित पाए गए हैं, उसमें यह बहुत खतरनाक स्वरूप में नहीं दिखा है। हालांकि खबर लिखे जाने तक XE वैरिएंट की स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि नहीं की है।

आइए जानते है क्या है XE वैरिएंट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)के अनुसार XE वैरिएंट कोरोना के दो वैरिएंट BA.1 और BA.2 से मिलकर बना है। और यह BA.2 की तुलना में 10 गुना ज्यादा संक्रामक है। हालांकि इसकी गंभीरता पर अभी डब्ल्यूएचओ ने यही कहा है कि अभी इस मामले में और अध्ययन करना जरूरी है। इस समय दुनिया में BA.2 वैरिएंट के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। चीन, ब्रिटेन, जर्मनी, अमेरिका सहित दुनिया के दूसरे देशों में कोविड की नई लहर की वजह BA.2 वैरिएंट को बताया जा रहा है।

यह BA.1 और BA.3 की तुलना में न केवल ज्यादा संक्रामक है। बल्कि इसके बारे में पता लगाना भी आसान नहीं है। इसलिए BA.2 को ‘स्टील्थ वैरिएंट’ भी कहा जा रहा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार इस समय यह पूरी दुनिया के संक्रमण के 86 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में शुरूआती जांच में यही बात सामने आई है कि BA.2 की तुलना में XE वैरिएंट 10 गुना ज्यादा संक्रामक है। अभी तक कोरोना के तीन हाइब्रिड स्ट्रेन की पहचान हो चुकी हैं। जो कि XD,XFऔर XE वैरिएंट हैं।

क्या हो सकते हैं लक्षण

रिपोर्ट के मुताबिक, चूंकि अभी इस वैरिएंट पर अध्ययन ही चल रहा है। ऐसे मे बुखार, गले में खरास, खांसी, बलगम और सर्दी, पेट की समस्या जैसे शुरूआती लक्षण दिख सकते हैं। इसके अलावा पहले से गंभीर रोगों से पीड़ित लोगों में नया वैरिएंट ज्यादा खतरनाक हो सकता है। चूंकि यह ओमीक्रॉन का ही म्यूटेशन है इसलिए इस बात की पूरी संभावना है कि नए वैरिएंट पर वैक्सीन का असर होगा। क्योंकि भारत में तीसरी लहर के दौरान बड़ी संख्या में वैक्सीनेशन होने की वजह से ओमीक्रॉन का असर दूसरी लहर जैसा नहीं हुआ था।

 

 

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