भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी मजबूती

नई दिल्ली:-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय यूरोप यात्रा पर देश- दुनिया की नजरें टिकी हुई थी, जिसे पीएम मोदी सफलतापूर्वक समाप्त कर स्वदेश लौट आए हैं। अपनी यात्रा के अंतिम दिन वह पेरिस पहुंचे थे, जहां पर उन्होंने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की। राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया। आपको बता दें कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को वैश्विक भलाई के लिए एक ताकत बनकर काम करने के तरीकों पर चर्चा की।

फ्रांसीसी भागीदारी पर सहमत

फ्रांस में पीएम मोदी ने नवनिर्वाचित फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ कई मुद्दों को लेकर बातचीत की। उन्होंने रक्षा, अंतरिक्ष, असैन्य परमाणु सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों सहित कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। इसके साथ ही दोनों नेता भारत और फ्रांस रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मानबीर भारत’ प्रयासों में गहरी फ्रांसीसी भागीदारी पर सहमत हुए। बैठक के दौरान, भारत-फ्रांस ने अपने सहयोग को और गहरा और मजबूत करने पर बातचीत की। साथ ही उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए नए क्षेत्रों में इसका विस्तार करके और अपनी अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी को व्यापक बनाकर भविष्य के लिए तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता की स्वीकृति दी।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भारत- फ्रांस रणनीतिक साझेदारियां

आपको बता दें कि भारत और फ्रांस ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए प्रमुख रणनीतिक साझेदारियों में से एक का निर्माण किया है। दोनों देश एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की दृष्टि एक दूसरे से साझा करते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्धता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए सम्मान, नेविगेशन की स्वतंत्रता, तनाव और संघर्ष से मुक्त क्षेत्र पर आधारित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस पहुंचने पर राष्ट्रपति मैक्रों से हुई बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र को प्रमुखता से दिखाया गया। भारत-प्रशांत साझेदारी में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य और स्थिरता शामिल है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा से न केवल दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत हुआ बल्कि दोनों नेताओं की मित्रता भी गहरी हुई। पीएम मोदी की तीन दिवसीय यूरोप यात्रा भले ही छोटी रही हो लेकिन इसके परिणाम भविष्य में बड़े और मजबूत दिखाई देंगे।

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