Wednesday , June 22 2022

बिजली संकट के स्थायी समाधान को लेकर अमित शाह ने उच्चस्तरीय की बैठक

नई दिल्ली:- तकरीबन छह-सात महीने के अंतराल पर ही देश के समक्ष दोबारा बिजली संकट पैदा होने से सरकार चिंतित है। लेकिन अब इस समस्या के जड़ में जाने को लेकर मंथन शुरू हो गया है। सोमवार को बिजली संकट के स्थायी समाधान को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें बिजली मंत्री आरके सिंह, रेलवे मंत्री अश्वनी वैष्णव और कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी के अलावा कुछ दूसरे वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में बिजली मंत्रालय में गैस व कोयले की कमी की वजह से फंसे बिजली संयंत्रों को शुरू करने पर नए सिरे से विचार शुरू हुआ है। सूत्रों का कहना है कि शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व का निर्देश है कि देश की औद्योगिक प्रगति की राह में बिजली क्षेत्र की तरफ से कोई समस्या नहीं पैदा होनी चाहिए।

बिजली मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि अप्रैल, 2022 में बिजली की खपत रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई है। इस महीने देश में 132.98 अरब यूनिट बिजली की खपत रही है जो अप्रैल, 2021 के मुकाबले 13.6 फीसद ज्यादा है। अप्रैल, 2020 में तो सिर्फ 85.44 अरब यूनिट की बिजली खपत हुई थी। हालांकि तब कोरोना की वजह से औद्योगिक क्षेत्र में बंदी थी। इसी तरह से कोल इंडिया की तरफ से बताया गया कि बिजली की खपत ज्यादा होते देख उसने कोयला आपूर्ति भी बढ़ा दी है। अप्रैल माह में थर्मल पावर प्लांट को 4.97 करोड़ टन कोयला दिया गया है जो अप्रैल, 2021 के मुकाबले 14.6 फीसद ज्यादा है। यह किसी भी एक महीने में कोल इंडिया की तरफ से किय गया सबसे ज्यादा उत्पादन है। औसतन इस महीने पावर सेक्टर को कोल इंडिया ने 16.6 लाख टन कोयला रोजाना दिया है जबकि महीने के अंतिम दिनों में आपूर्ति बढ़ा कर 17.3 लाख टन कर दिया गया है।
कोल इंडिया के अलावा भी कुछ दूसरी कंपनियों ने बिजली संयंत्रों को कोयला भेजा है। इन संयंत्रों के पास पहले से भी कुछ कोयले का स्टाक रहता है। मोटे तौर पर देश के सभी ताप बिजली घरों को रोजाना 22 लाख टन कोयला चाहिए होता है।
कई राज्यों में तेजी से बढ़ी बिजली की मांग

बिजली मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा समस्या के पीछे सबसे बड़ी वजह बिजली की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि ही है। 29 अप्रैल, 2022 को बिजली की मांग 2.07 लाख मेगावाट को भी पार कर गई थी। अप्रैल महीने में देश में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच 1.8 अरब यूनिट का अंतर रहा है जो अक्टूबर, 2015 के बाद सबसे ज्यादा अंतर है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों के साथ ही पहाड़ी राज्यों में भी बिजली की मांग काफी तेजी से बढ़ गई है और यह मांग आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।

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