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प्रधानमंत्री मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे पर आपत्ति जताने वाले पाकिस्तान को भारत ने दिया करारा जवाब

प्रधानमंत्री मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे पर आपत्ति जताने वाले पाकिस्तान को भारत ने करारा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को प्रधानमंत्री मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी की ओर से चिनाब नदी पर रतले और क्वार पनबिजली परियोजनाओं के निर्माण की आधारशिला रखने पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह सिंधु जल संधि का खुला उल्लंघन है।

 

पाकिस्तान को लेकर भारत के रुख में बदलाव के मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत का रुख बहुत सीधा है कि ऐसा एक माहौल होना चाहिए जिसमें आतंकवाद नहीं हो। शांतिपूर्ण माहौल में ही बातचीत हो सकती है। हमारा मुख्य मुद्दा हमेशा यही रहा है। यह हमारी जायज मांग है, इसमें कोई बदलाव नहीं है।

बता दें कि पीएम मोदी रविवार को जम्मू-कश्मीर के दौरे पर थे। उन्होंने इस यात्रा के दौरान रतले और क्वार जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला रखी थी। किश्तवाड़ में चिनाब नदी पर 850 मेगावाट की रतले और 540 मेगावाट की क्वार जलविद्युत परियोजना का निर्माण किया जाना है। इन परियोजनाओं पर लगभग 5,300 करोड़ रुपये और 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। पीएम मोदी के दौरे से बौखलाए पाकिस्तान ने इसे लेकर गलतबयानी की थी।

चीन के नागरिकों को फिलहाल भारत का पर्यटक वीजा नहीं
चीन के नागरिकों को भारत का पर्यटक वीजा नहीं देने के मामले में आज विदेश मंत्रालय ने अहम बयान दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने नियमित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हम शंघाई जैसे चीनी शहरों में कोविड-19 की स्थिति से अवगत हैं। चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा जारी करने का यह उपयुक्त समय नहीं है। अरिंदम बागची ने कहा कि चीन ने खुद हमें वीजा जारी नहीं किया है। साल 2020 से भारत को वीजा जारी करना निलंबित किया हुआ है। चीन के लिए पर्यटक वीजा जारी करने पर चर्चा करने का सही समय नहीं है।

चीन को उसी की भाषा में जवाब
दरअसल, इस मामले में भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया है। वैश्विक एयरलाइंस निकाय (IATA) के मुताबिक, भारत ने चीनी नागरिकों के पर्यटक वीजा को निलंबित कर दिया है। भारत द्वारा यह निर्णय तब लिया गया जब 22 हजार से अधिक भारतीय छात्रों को चीन वापस लौटने की अनुमति नहीं दे रहा है।

दरअसल, कोरोना की वजह से 22 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र चीन से वापस आ गए थे। अब ये छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए वापस चीन जाना चाहते हैं, लेकिन चीन इन छात्रों को वापस आने की अनुमति नहीं दे रहा है। चीन द्वारा इन छात्रों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है। इसके जवाब में भारत ने भी कार्रवाई की है। आईएटीए ने बताया था कि भारत द्वारा चीनी नागरिकों को जारी किए गए पर्यटक वीजा अब वैध नहीं हैं। हालांकि चीनी नागरिकों को व्यापार, रोजगार, राजनयिक और आधिकारिक वीजा दिया जा रहा है।

हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक
चीन के अड़ियल रुख की वजह से हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। इस मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने 17 मार्च को कहा था कि भारत ने बीजिंग से इस मामले में सौहार्दपूर्ण रुख अपनाने का आग्रह किया था, क्योंकि सख्त प्रतिबंधों की निरंतरता हजारों भारतीय छात्रों के शैक्षणिक करियर को खतरे में डाल रही है। बागची ने बताया कि इससे पहले चीन ने कहा था कि वह इस मामले पर विचार कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद इस दिशा में कुछ नहीं हुआ।

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