Wednesday , June 22 2022

देश में गहराते बिजली संकट को रोकने में रेल मंत्रालय ने झोंकी ताकत

नई दिल्ली:  देश में गहराते बिजली संकट को रोकने में बिजली, कोयला और रेलवे मंत्रालय की सक्रियता चरम पर है। बिजली संयंत्रों को कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड ने उत्पादन बढ़ाया है। साथ ही कोयले की ढुलाई बढ़ाने के लिए रेल मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में है। इसके बावजूद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत कुछ दूसरे राज्यों में बिजली की कटौती शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि यदि कोयला आपूर्ति तेजी से नहीं बढ़ाया गया तो मई के पहले पखवाड़े में देश के कई राज्यों में बिजली कटौती की स्थिति पैदा हो जाएगी।
अगर बिजली मंत्रालय की तरफ से दिए गए आंकड़ों पर गौर करें तो साफ हो जाता है कि बिजली संकट की यह स्थिति पिछले चार पांच वर्षों के दौरान धीरे धीरे कोयला आधारित बिजली संयंत्रों की पूरी निगरानी नहीं करने और कोयला उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से बनी है। वर्ष 2017-18 के बाद के पांच वर्षों के दौरान देश में बिजली की स्थिति पर नजर डालें तो यह पता चलता है कि इस दौरान पीक आवर के दौरान डिमांड (24 घंटे में किसी एक समय बिजली की अधिकतम मांग) में 24 फीसद का इजाफा हुआ है।
पीक आवर डिमांड इस अवधि में 1.64 लाख मेगावाट से बढ़ कर दो लाख मेगावाट हो चुका है लेकिन इस दौरान देश में बिजली का उत्पादन 1308 अरब यूनिट से बढ़ कर सिर्फ 1320 अरब यूनिट हुआ है। मार्च 2018 में देश में कोयला, गैस व रिनीवेबल सेक्टर से मिला कर 1308 अरब यूनिट बिजली बनी जबकि मार्च, 2022 में 1320 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ है। असलियत में 2014-15 के बाद से सालाना स्तर पर बिजली उत्पादन की दर लगातार घटती रही है।
वर्ष 2018-19 में बिजली उत्पादन में 5.19 फीसद की वृद्धि हुई। वर्ष 2019-20 में यह वृद्धि दर घट कर सिर्फ 0.95 फीसद रह गई। इसके बाद के वर्ष 2020-21 में तो 2.49 फीसद की गिरावट हुई (मुख्य वजह कोरोना महामारी की वजह से आर्थिक बंदी)। वर्ष 2021-22 के दौरान बिजली उत्पादन 6.9 फीसद की वृद्धि के साथ 1320 अरब यूनिट हुआ है। चिंता की बात यह है कि कोयला आपूर्ति बढ़ाने के बावजूद बिजली उत्पादन पिछले तीन महीनों से 1320 अरब यूनिट के आस पास ही बना हुआ है।
ऐसे में भीषण गर्मी और औद्योगिक उत्पादन बढ़ने से अगर मई, 2022 में बिजली की मांग में ज्यादा उछाल आएगा तो स्थिति बिगड़ सकती हैं। इस वजह से ही अगले महीने ज्यादा बिजली कटौती की आशंका जताई जा रही है। बिजली उत्पादन में खास वृद्धि नहीं होने के पीछे सबसे बड़ा कारण भी बिजली मंत्रालय के दूसरे आंकड़े बताते हैं।

इसके मुताबिक कोयला और लिग्नाइट आधारित बिजली संयंत्रों का प्लांट लोड फैक्टर (किसी खास समय में संयंत्रों की तरफ से पैदा की जाने वाली अधिकतम बिजली) पिछले पांच वर्षों में 55.32 फीसद से घट कर 53.05 फीसद हो गई है। यह एक वजह है कि वर्ष 2021-22 के पहले दस महीनों में भारत में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर पिछले चार वर्षों के दौरान अधिकतम 1.2 फीसद हो चुका है। इन दस महीनों में देश में बिजली की मांग 2.03 लाख मेगावाट की थी जबकि आपूर्ति 2.0 लाख मेगावाट की रही।

हालांकि यह स्थिति वर्ष 2014-15 में मांग व आपूर्ति के अंतर 4.7 फीसद से बेहतर है लेकिन वर्ष 2017-18 के बाद बिजली की मांग, इसकी आपूर्ति से 1.2 फीसद ज्यादा कभी नहीं रही। इस स्थिति के लिए यह कारण भी जिम्मेदार है कि देश में अभी 60 हजार मेगावाट क्षमता के बिजली प्लांट कोयला या गैस की कमी या दूसरी वजहों से बंद हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

16 − 4 =