Wednesday , June 22 2022

दिल्ली हाई कोर्ट ने पूछा क्या भारत के प्रधानमंत्री के संबंध में ‘जुमला’ शब्द का इस्तेमाल करना उचित है

नई दिल्ली:–  फरवरी, 2020 में हुए उत्तर पूर्वी दिल्ली के इलाकों में दंगों के षड्यंत्र मामले में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद की जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या भारत के प्रधानमंत्री के संबंध में ‘जुमला’ शब्द का इस्तेमाल करना उचित है।

दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि जब सरकार की आलोचना की बात आती है तो उसके लिए भी लक्ष्मण-रेखा होनी चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के अमरावती में खालिद द्वारा दिए गए भाषण को सुनने के बाद अपनी टिप्पणी करते हुए कहा कि छात्र नेता और दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री के बारे में ‘जुमला’ शब्द इस्तेमाल किया। हाई कोर्ट ने उमर खालिद के व्यवहार और शब्दों को लेकर पूछा कि क्या यह उचित है
वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट के अवलोकन पर प्रतिक्रिया देते हुए दंगों की आरोपित उमर खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने तर्क दिया कि सरकार की आलोचना अपराध नहीं बन सकती। सरकार के खिलाफ बोलने वाले व्यक्ति के लिए यूएपीए के आरोपों के साथ 583 दिनों की जेल की परिकल्पना नहीं की गई थी।

उन्होंने कहा कि उमर खालिद के खिलाफ प्राथमिकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ असहिष्णुता का परिणाम है। बता दें कि 19 महीने से जेल में बंद जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद ने 24 मार्च को जमानत देने से इन्कार करने के कड़कड़डूमा कोर्ट के निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

7 − three =