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चुनाव में हार के बाद मायावती की बैठक, नेताओं को मिले सख्त निर्देश

Lucknow. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में मिली करारी हार के बाद बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने रविवार को लखनऊ में पार्टी पदाधिकारियों के साथ पहली बड़ी समीक्षा बैठक की। इस मीटिंग में पार्टी के महासचिव सतीश चन्द्र मिश्रा, बसपा के विधायक उमा शंकर सिंह भी मौजूद रहे। मीटिंग में 3 बड़े फैसले लिए। पहला, भतीजे आकाश आनंद को दोबारा बसपा का नेशनल को-ऑर्डिनेटर बनाया। दूसरा, प्रदेश में सभी इकाइयां भंग की।

तीसरा, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से चुनाव लड़े गुड्डू जमाली की बसपा में वापसी हुई है। इसके साथ ही पार्टी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर को बनाए रखने का फैसला किया है और तीन राज्य समन्वयकों को नियुक्त किया है- मेरठ के पूर्व सांसद मुनकाद अली, बुलंदशहर के राजकुमार गौतम और आजमगढ़ से पूर्व एमएलसी डॉ विजय प्रताप होंगे।

इससे पहले मायावती ने मायावती ने ट्वीट करके लिखा कि बसपा प्रवक्ता TV डिबेट में नहीं जाएंगे। मायावती ने लिखा, ‘यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान मीडिया द्वारा अपने आकाओं के दिशा-निर्देशन में जो जातिवादी द्वेषपूर्ण और घृणित रवैया अपनाकर अम्बेडकरवादी बसपा मूवमेंट को नुकसान पहुंचाने का काम किया है, वह किसी से भी छिपा नहीं है।

इस हालत में पार्टी प्रवक्ताओं को भी नई जिम्मेदारी दी जाएगी। मायावती ने एक और पोस्ट शेयर कर लिखा कि मीडिया के इस रवैये से पार्टी के सभी प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया, धर्मवीर चौधरी, डॉ. एमएच खान, फैजान खान और सीमा कुशवाहा अब TV डिबेट आदि कार्यक्रमों में शामिल नहीं होंगे।

बता दें कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से महज 1 पर जीत हासिल करने वाली बसपा अब ऐक्शन मोड में आती दिख रही है। मायावती ने अहम फैसला लेते हुए सभी कमेटियों को भंग कर दिया है। इसके अलावा आजमगढ़ लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए प्रत्याशी का भी ऐलान कर दिया है। बसपा की ओर से शाह आलम उर्फ़ गुड्डू जमाली को उपचुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया गया है। वह असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को छोड़कर बसपा में शामिल हुए हैं।

आजमगढ़ लोकसभा सीट से अखिलेश यादव ने इस्तीफा दे दिया है और करहल का विधायक ही बने रहने का फैसला लिया है। गुड्डू जमाली को उम्मीदवार घोषित करने से आजमगढ़ के उपचुनाव में सपा को झटका लग सकता है, जिसे आम तौर पर मुस्लिमों के वोट मिलते रहे हैं। आजमगढ़ सीट मुस्लिम और यादव बहुल है, जिसे समाजवादी पार्टी के लिए जिताऊ समीकरण समझा जाता रहा है। ऐसे में बसपा का यह ऐलान सपा की चिंताओं को बढ़ाने वाला है। शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने ओवैसी की पार्टी से ही आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था। वह AIMIM के अकेले ऐसे प्रत्याशी थे, जो अपनी जमानत बचा सके।

दरअसल असदुद्दीन ओवैसी ने कुल 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक ही सीट पर जमानत बच पाई। इससे साफ है कि गुड्डू जमाली का अपना भी कुछ जनाधार है और यही वजह है कि बसपा ने उन्हें कैंडिडेट बनाया है। गुड्डू जमाली को कुल 36,419 वोट हासिल हुए हैं। मुबारकपुर सीट से सपा को जीत हासिल हुई है, जबकि बसपा दूसरे स्थान पर थी और भाजपा को तीसरे नंबर पर ही संतोष करना पड़ा।
एडीआर रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुड्डू जमाली ने अपनी संपत्ति में सबसे 77.09 करोड़ की वृद्धि घोषित की। 2017 में उनकी संपत्ति 118.76 करोड़ थी जो अब 195.85 करोड़ हो गई है।

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