घर में कभी नहीं होगी पैसों की कमी,मां लक्ष्मी के इन मंत्रों का करें जाप

नई दिल्ली: शास्त्रों में मां लक्ष्मी को धन-धान्य, संपदा,वैभव की देवी माना जाता है। मान्यता है कि जिस व्यक्ति के ऊपर मां लक्ष्मी की कृपा होती है उसे कभी भी धन की कमी नहीं होता है। आमतौर पर मां लक्ष्मी की पूजा नियमित रूप से करनी चाहिए। लेकिन शुक्रवार का दिन महालक्ष्मी को ही समर्पित है। माना जाता है कि शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जानिए महालक्ष्मी के उन मंत्रों के बारे में जिनका जाप करने से हर तरह के संकटों से छुटकारा मिल जाएगा और सौभाग्य की प्राप्ति होगी
1- मां लक्ष्मी का बीज मंत्र

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनके बीज मंत्र का जाप किया जा सकता है। इस मंत्र का जाप कमल गट्टे की माला से करना चाहिए।

ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नमः:।।

2- मां लक्ष्मी का मंत्र

सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए महालक्ष्मी के इस मंत्र का करीब 108 बार जाप करना शुभ साबित होगा
ऊँ श्रीं क्लीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।

3- कर्ज से मुक्ति पाने के लिए मंत्र

शुक्रवार के दिन महालक्ष्मी के इस मंत्र का जाप करने से धन संबंधी हर समस्या से छुटकारा मिल जाता है और मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा जातक के ऊपर बनी रहती हैं। इसके साथ ही कर्ज से छुटकारा मिल जाता है।

ऊँ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:। ।

4- धन लाभ के लिए मंत्र

मां लक्ष्मी के इस मंत्र का जाप करने से मां लक्ष्मी घर में ही वास करती हैं।

या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।

या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥

या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।

सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥

5- सभी कामनाएं पूर्ण करने के लिए
मां लक्ष्मी के इस मंत्र का जाप करने से हर तरह की कामनाएं पूर्ण हो जाती है। इसलिए कमल गट्टे की माला से 108 बार हर शुक्रवार इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा।

6- हर काम में सफलता पाने के लिए

अगर किसी काम में बार-बार कोई न कोई अड़चन आ रही हैं तो शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के इस मंत्र का 108 बार जाप करना लाभकारी होगा।
ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:

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