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ईडी ने चीन की कंपनी साओमी के जोर जबरदस्ती करने के आरोपों को बताया निराधार

नई दिल्ली । चीनी मोबाइल निर्माता कंपनी साओमी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी साओमी इंडिया के अधिकारियों द्वारा ‘जोर जबरदस्ती के तहत’ बयान दर्ज कराने के आरोपों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। ईडी ने कहा कि कंपनी ने इस तरह के आरोप कार्रवाई के बाद सोच-समझकर लगाए हैं। ईडी अखबारों में कुछ खबरों पर जवाब दे रही थी, जिसमें कहा गया था कि साओमी ने कर्नाटक हाई कोर्ट के समक्ष हाल ही में दायर याचिका में आरोप लगाया था कि उसके शीर्ष अधिकारियों को बेंगलुरु में ईडी के जांचकर्ताओं ने पूछताछ के दौरान शारीरिक हिंसा और जोर जबरदस्ती करने की धमकी दी थी।

ईडी ने एक बयान जारी कर कहा कि वह एक निष्ठावान पेशेवर एजेंसी है। पूरी कार्रवाई के दौरान कभी भी कंपनी के अधिकारियों न तो धमकाया गया और न ही किसी तरह की जोर जबरदस्ती हुई। यह आरोप कि ईडी द्वारा साओमी इंडिया के अधिकारियों के बयान जबरन लिए गए असत्य और निराधार हैं।

साओमी इंडिया के अधिकारियों ने विभिन्न अवसरों पर सबसे अनुकूल माहौल में स्वेच्छा से फेमा के तहत ईडी के समक्ष अपने बयान दिए। ईडी ने कहा कि जांच के दौरान कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और सूचनाओं के आधार पर अधिकारियों ने बयान दिए।
उल्लेखनीय है ईडी ने 29 अप्रैल को भारतीय विदेशी मुद्रा कानून (फेमा) के कथित उल्लंघन पर साओमी इंडिया के 5,551 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जब्त करने का आदेश पारित किया। कंपनी द्वारा जोर-जबरदस्ती के आरोप उसी कड़ी में सामने आए हैं। हालांकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ईडी के इस आदेश पर रोक लगा दी है।

एजेंसी ने कहा कि साओमी के ग्लोबाल वाइस प्रेसीडेंट मनु कुमार जैन का बयान चार मौकों, 13 अप्रैल, 14 अप्रैल, 21 अप्रैल और 26 अप्रैल को दर्ज किया गया जबकि चीफ फाइनेंसियल आफीसर समीर बी एस राव के बयान छह मौकों 25 मार्च, 14 अप्रैल, 19 अप्रैल, 21 अप्रैल, 22 अप्रैल और 26 अप्रैल को दर्ज किए गए। हालांकि, विभिन्न अवसरों पर बयान दर्ज करने के दौरान किसी भी समय उनके द्वारा कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई।

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