Women’s Day Special : बाधाओं को हराकर ‘अपराजिता’ बनीं ये बेटियां

आज के इस युग में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों से कदम से कदम मिला कर चल रही है। क्रिकेट हो या पावर लिफ्टिंग, शतरंज हो या निशानेबाजी, हर खेल में महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इनके खेल कौशल से ताजनगरी का नाम राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका है। इन्होंने न केवल तमाम कीर्तिमान बनाए हैं, बल्कि पदक जीतकर देश का नाम भी रोशन किया है।

जानिए कैसे बाधाओं को पारकर अपराजिता बनीं इन बेटियों की सफलता की कहानी..

1 . सेंट एंड्रूज स्कूल की छात्रा संस्कृति गोयल ने यूनान में आयोजित विश्व यूथ शतरंज चैंपियनशिप में अंडर-16 में कांस्य पदक पर कब्जा किया। इस चैंपियनशिप में संस्कृति अंतरराष्ट्रीय स्तर की सबसे मजबूत खिलाड़ी को हराकर कांस्य पदक विजेता बनीं। अंडर-16 आयु वर्ग में शतरंज की सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी रह चुकी हैं। संस्कृति ने 2017 में नेशनल चैंपियनशिप में अंडर-15 में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। वहीं थाईलैंड में 2018 में एशियन यूथ चेस चैंपियनशिप में अंडर-16 में सिल्वर मेडल पर कब्जा किया। अहमदाबाद में 2017 में अंडर-15 नेशनल गर्ल्स चेस चैंपियनशिप में दूसरा स्थान प्राप्त किया। दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ चेस चैंपियनशिप में संस्कृति चौथे स्थान पर रहीं।

2 . अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निशानेबाजी में सोनिया शर्मा अपने शहर का नाम रोशन कर रही है। आपको बता दें कि एक हाथ से दिव्यांग होने के बाद भी उनकी निशानेबाजी सटीक रहती है। सोनिया ने 2017 में दुबई में पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर पिस्टल में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। 2017 में ही बैंकॉक में आयोजित पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। फिर पूना में 2017 में नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल विजेता रहीं। इसके बाद 2018 में दुबई में पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में दस मीटर एयर पिस्टल में आठवीं रैंक रही । 2018 में ही साउथ कोरिया में पैरा शूटिंग चैंपियनशिप में प्रतिभाग किया।

3 . इंडियन कॉर्फबाल टीम की कप्तान रह चुकी रीना सिंह अपने शहर आगरा का नाम रोशन किया है। रीना ने 1993 में खेल की शुरुआत की थी। उस समय क्रिकेट और हॉकी को छोड़कर किसी अन्य खेल में महिलाओं का प्रतिभाग ज्यादा नहीं था। उत्तर प्रदेश की तरफ से खेलते हुए रीना ने 1998 में टीम को कई मेडल्स दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। 2002 में एशियन-ओशियाना चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। बेल्जियम में एशिया-यूरो चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। वहीं 2003 में नीदरलैंड में वर्ल्ड कप कॉर्फबाल चैंपियनशिप में उप कप्तान बनाया गया। इसके बाद 2006 में भारतीय कॉर्फबाल टीम का कप्तान बनाया गया। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम को रीना ने हांगकांग में आयोजित एशिया-ओशियाना चैंपियनशिप में कांस्य पदक पर कब्ज़ा किया। रीना चेक गणराज्य में वर्ल्ड कप कॉर्फबाल चैंपियनशिप में भी देश की पहली तीसरा वर्ल्ड कप खेलने वाली खिलाड़ी बनीं।