Sawan Shivratri : सावन की शिवरात्रि कल, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

धर्म डेस्क। देवो के देव महादेव का प्रिय माह सावन 25 जुलाई से शुरू हो चुका है। सावन के इस पावन महीने में भगवान शिव की पूजा अर्चना से हर बिगड़े काम बनते हैं। वहीं 6 अगस्त को शिवरात्रि है। इस दिन पूजा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। इस दिन भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा- अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बता दें कि प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्री मनाई जाती है। इस दिन को लेकर ऐसी मान्यता है कि सावन में भगवान शिव अपने सभी परिवार समेत धरती पर विराजते हैं। इसी वजह से सावन शिवरात्रि की पूजा शिव भक्तों के लिए बहुत अहम होता है

शिव पूजा-सामग्री
पुष्प, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव और मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री आदि. शिवजी की पूजा में इन सभी वस्तुओं को यथा संभव पूरा उपयोग करें।

पूजा विधि-

सावन शिवरात्रि के दिन सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पास के शिव मंदिर जाएं। इस दिन विशेष रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक करके महादेव से आशीर्वाद प्राप्त करें। पूजा की सभी सामग्रियों को भगवान शिव को विधि-विधान से अर्पित करें। भगवान शिव की आरती करें। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। सावन शिवरात्रि पर व्रत रखकर अगले दिन शुभ पारण मुहूर्त में व्रत तोड़ें। भगवान शिव की विशेष कृपा होगी।

शिवरात्रि मुहूर्त

-सावन मास चतुर्दशी तिथि का आरंभ – 06 अगस्त, शाम 06 बजकर 28 बजे से होगा।

-सावन मास चतुर्दशी तिथि का समापन- 07 अगस्त की शाम 07 बजकर 11 मिनट बजे होगा।

व्रत पारण समय

07 अगस्त, शनिवार सुबह 05 बजकर 46 मिनट से दोपहर 03 बजकर 45 मिनट तक.

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