खाने-खिलाने के शौक़ीन हैं दीपक, 4 साल से गरीबों को खिलते हैं मुफ्त में खाना

खाने-खिलाने के शौक़ीन हैं दीपक, 4 साल से गरीबों को खिलते हैं मुफ्त में खाना

खाने-खिलाने के शौक़ीन हैं दीपक, 4 साल से गरीबों को खिलते हैं मुफ्त में खाना

नई दिल्ली : भाग-दौड़ कि जिंदगी में लोगों के लिए खुद को समय देना ही बेहद मुश्किल हो गया है कि वह दूसरों के बारे में सोचन ही भूल जाते हैं. ऐसे में औरों के चहरे पर मुस्कराहट लेन वाले लोग बहुत कम होते हैं. इन्ही में से एक हैं मयूर विहार फेज-1 में रहने वाले दीपक पुरोहित, जो गरीब व झुग्गी बस्ती में रहने वाले बच्चों के जीवन में खुशियों के रंग भर रहे हैं.

बच्चों को चॉकलेट व पेस्ट्री बांटते हैं दीपक

बीते चार वर्षों से रोजाना वह बच्चों को अपने रेस्तरां में मुफ्त में खाना खिलाते हैं और उन्हें चॉकलेट व पेस्ट्री बांटते हैं. वहीं, दीपक ने कोरोनाकाल में फुटपाथ पर रहने वाली महिलाओं व बच्चों को भी खाना खिलाना शुरू किया है. उन्होंने बताया कि मयूर विहार के आसपास कई झुग्गी-बस्ती वाले ईलाके हैं जहां से कई बच्चे उनके रेस्तरां के बाहर प्लास्टिक आदि उठाने आते हैं.

खाने-खिलाने के शौक़ीन हैं दीपक, 4 साल से गरीबों को खिलते हैं मुफ्त में खाना

दीपक एक मध्यवर्गीय परिवार से हैं. उन्हें खाने-पानी का भी बहुत शौक था और दूसरों को खिलाना भी बहुत पसंद था. अपने इसी के शौक के कारण उन्होंने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई भी की. पढ़ाई के बाद उन्होंने एक-दो बड़े फाइव स्टार होटल में नौकरी भी की. वे नौकरी पर निर्भर हुए तो उन्हें महसूस हुआ कि अगर वह खुद का काम शुरू करेंगे तो दूसरे लोगों के लिए भी कुछ कर पाएंगे. जिसके बाद उन्होंने करीब चार साल पहले नौकरी छोड़कर मयूर विहार फेज-1 में ही 36, लेबजेल्टर (36, Lebzelter) नाम से खुद का रेस्तरां शुरू किया.

कोरोरनाकाल में महिलाओं को खाना खिलाना शुरू किया

दीपक ने बताया कि कोरोनकाल के दौरान कई लोगों रोजगार से हाथ धो बैठे, पेट पलने के लिए उनकी दुकान के पास फुटपाथ पर कई गरीब व जरूरतमंद महिलाएं अपने बच्चे के साथ बैठने लगी. उन महिलाओं को भी उन्होंने खाना खिलाना शुरू किया. उन्होंने बताया कि रोजाना 20 से 30 लोगों को वह निशुल्क खाना खिलाते हैं, जिससे उनके दिल को सुकून मिलता है.

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