20 रुपए के लाइसेंस की वजह से मरने को मज़बूर है लोग, जानिए पूरा मामला

20 रुपए के लाइसेंस की वजह से मरने को मज़बूर है यहां के लोग, जानिए पूरा मामला

20 रुपए के लाइसेंस की वजह से मरने को मज़बूर है यहां के लोग, जानिए पूरा मामला

आगरा: भारत में किसी भी प्रकार के लाइसेंस बनवाने बड़ा मुश्किल काम माना जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में लाइसेंस बनवाना घंटो का नही बल्कि मिनटों का काम है और वो भी महज़ 20 रुपए के शुल्क में। किसी भी आम नागरिक के मन में ख्याल आता ही है की कौन सा है ये लाइसेंस। तो हम आपको बता दें कि हम बात कर रहें हैं साहूकारी के लाइसेंस की।जिसे दुकानदार एक बार बनवा के पूरे साल जनता का शोषण करने में लगे रहतें हैं।

गैर लाइसेंसी साहूकार तो जरूरतमंदों का उत्पीड़न कर ही रहे हैं, लाइसेंसी साहूकारों पर भी कोई लगाम नहीं है। एक बार लाइसेंस जारी करने के बाद इनकी न तो कभी जांच होती है और न ही उनका कोई रिकार्ड देखा जाता। 20 रुपये सालाना फीस जमा कर लाइसेंस लेने वाले साहूकार भी मन माफिक ब्याज वसूल रहे हैं।

साहूकारों के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा लाइसेंस जारी किए जाते हैं। आवेदनकर्ता का पुलिस के माध्यम पड़ताल कराई जाती है। उसके बाद 20 रुपये सालाना फीस पर साहूकारी का लाइसेंस दे दिया जाता है। यह लोग जरूरतमंदों को आरबीआई के दिशा-निर्देश के अनुसार ब्याज पर लोन उपलब्ध करा सकते हैं। मगर, अधिकांश लाइसेंसी साहूकार इसकी आड़ में जरूरतमंदों का उत्पीड़न कर रहे हैं। नियम के तहत संबंधित तहसील और पुलिस के माध्यम से समय-समय पर इनकी जांच भी करानी होती है। मगर, पिछले एक साल में शहर के एक भी लाइसेंसी साहूकार की कार्यप्रणाली की जांच नहीं कराई गई।

साहूकार करतें हैं जनता का प्रताड़ित

20 की सालाना फीस पर साहूकारी का लाइसेंस मिलने के बाद साहूकार आम जनता का मन चाहे ढंग से प्रताड़ित करतें हैं। कई ऐसे मामले हैं जिनमें सहुकर्रों की प्रताड़ना की वजह से लोगों ने आत्महत्या तक करने क्या प्रयास किया।

केस एक 27 सितंबर को शाहगंज के ग्यासपुरा में साहूकार के उत्पीड़न से जूता कारीगर ने अपने परिवार के साथ आत्महत्या का प्रयास किया। समय रहते पूरे परिवार को बचा लिया गया।

केस दो इसी साल जनवरी में नगला पदी निवासी सब्जी विक्रेता ने क्षेत्र के ही एक साहूकार पर तय ब्याज से अधिक ब्याज वसूलने का आरोप लगाया। उसकी शिकायत भी दर्ज नहीं की गई थी।

तथ्य

157 साहूकार सदर तहसील क्षेत्र अंतर्गत पंजीकृत हैं।

01 साल से लटकी है लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया।

15 फीसद तक ब्याज वसूलते हैं गैर लाइसेंसी साहूकार।

ये भी हैं नियम

− लाइसेंस धारी पैसे वापस लेने के लिए बाहुबल का उपयोग नहीं कर सकता।

– आरबीआई की गाइड लाइंस से ज्यादा ब्याज नहीं लेगा।

– अगर कोई लाइसेंस धारी नियमों का उल्लंघन कर रहा है तो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।

हर रोज़ वसूलते हैं ब्याज

वैसे तो ब्याज महीने में वसूली जाती है लेकिन मजदूरों और ठेल लगाने वालों से साहूकार हर रोज ब्याज वसूलते हैं। लाइसेंस और गैर लाइसेंसी साहूकार के गुर्गे हर शाम को निकलते हैं और ब्याज वसूली करके लाते हैं। एक दिन ब्याज न देने पर अलग से जुर्माना वसूला जाता है।

साहूकारी के लाइसेंसों की पड़ताल कराई जा रही है। नियमों के तहत कार्य न करने वाले पंजीकृत लोगों के साहूकारी के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।

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