शिक्षा नीतियों में बदलाव के बाद 10+2 का फॉर्मेट समाप्त, जानिए ख़ास बातें

शिक्षा नीतियों में बदलाव के बाद 10+2 का फॉर्मेट समाप्त, जानिए ख़ास बातें

शिक्षा नीतियों में बदलाव के बाद 10+2 का फॉर्मेट समाप्त, जानिए ख़ास बातें

Spread the News

नई दिल्ली : कैबिनेट द्वारा नई शिक्षा नीतियों को मंजूरी दे दी गई हैं. इन नई नीतियों के तहत स्कूल से लेकर हायर एजुकेशन स्तर पर शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव किए गए हैं. इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में 21वीं सदी की नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई. यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि 34 सालों से शिक्षा नीति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था. मुझे उम्मीद है कि देशवासी इसका स्वागत करेंगे. आप भी पढ़ें नई शिक्षा नीति की खास बातें…

बड़े स्तर पर ली गई सलाह

उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दो समितियां बनाई गई थी. जिसमें से एक टीएसआर सुब्रमण्यम समिति और दूसरी डॉ. के कस्तूरीरंगन समिति बनाई गई थी. इन नई शिक्षा नीतियों के लिए बड़े स्तर पर सलाह लेने का कम भी किया गया था. इसके लिए देश की 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लॉक और 676 जिलों से उनकी राए मांगी गई थी. लोगों से पूछा गया कि आप नई शिक्षा नीति में क्या-क्या बदलाव चाहते हैं जिसके जवाब में करीब सवा 2 लाख सुझाव आए थे.

मानव संसाधन मंत्रालय का बदला गया नाम

वहीँ इसी कड़ी में अब मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय किया गया है. शुरुआत में इस मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय ही था लेकिन 1985 में इसे बदलकर मानव संसाधन मंत्रालय किया गया. नई शिक्षा नीति के तहत इसे फिर से शिक्षा मंत्रालय नाम देने का सुझाव दिया गया था. बता दें नयी शिक्षा नीति का विषय 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में भी शामिल था.

10+2 के फार्मेट को किया गया समाप्त

इन नई शिक्षा नीतियों में 10+2 के फार्मेट को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. अब इसे 10+2 से बांटकर 5+3+3+4 फार्मेट में परिवर्तित कर दिया जाएगा. इसका मतलब ये है कि अब स्कूल के पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूलिंग के तीन साल और कक्षा एक और कक्षा 2 के साथ ही फाउंडेशन स्टेज शामिल होंगे. फिर अगले तीन साल कक्षा 3 से 5 की तैयारी के लिए होंगे. इसके बाद में तीन साल मध्य चरण में कक्षा 6 से 8 और माध्यमिक अवस्था के चार वर्ष कक्षा 9 से 12.इस फॉर्मेट को बच्चो की 3-8, 8-11, 11-14, और 14-18 साल की उम्र के अनुसार लागू किया जएगा. इसके अलावा स्कूलों में आर्ट ,कॉमर्स, साइंस स्ट्रीम का कोई ऐसा नियम नहीं होगा जिसे स्कूल के हिसाब से चलाया जाए, छात्र अब जो भी syllabus चाहें, वो ले सकते हैं, ये पूरी तरह से छात्रों पर निर्भर होगा.

पसंदीदा विषय चुनने के लिए दिए जाएंगे कई विकल्‍प

प्रकाश जावडेकर ने बताया कि स्टूडेंट्स को पसंदीदा विषय चुनने के लिए कई विकल्‍प दिए जाएंगे. जिसमें आर्ट और साइंस, व व्यावसायिक एवं शैक्षणिक विषयों के बीच कोई अंतर नहीं होगी. नयी नीति के तहत स्कूलों में छठी कक्षा से ही व्यावसायिक शिक्षा शुरू हो जाएगी साथ ही इसमें इंटर्नशिपस भी शामिल रहेंगी.

स्थानीय भाषा को रखा जाएगा माध्यम

इसी क्रम में ग्रेड 5 तक और उससे आगे स्थानीय भाषा को ही शिक्षा का माध्यम रखने पर खास जोर दिया गया है. इसके तहत सभी स्तरों और उच्च शिक्षा में संस्कृत को एक विकल्प के रूप में चुनने का अवसर दिया जाएगा. त्रि-भाषा फॉर्मूला में भी यह विकल्‍प शामिल होगा. लेकिन किसी भी विद्यार्थी पर किसी भी भाषा के चुनाव को लेकर कोई दबाव नहीं होगा. भारत की अन्य पारंपरिक भाषाएं और साहित्य भी विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगे.

छात्रों को नहीं करना पड़ेगा M.Phil

वहीँ अब नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद अब छात्रों को एमफिल नहीं करना पड़ेगा. एमफिल का कोर्स नई शिक्षा नीति में निरस्त कर दिया गया है. नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद अब छात्र ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और उसके बाद सीधे पीएचडी करेंगे. 4 साल का ग्रेजुएशन डिग्री प्रोग्राम फिर MA और उसके बाद बिना M.Phil के सीधा PhD कर सकते हैं. नई शिक्षा नीति के तहत एमफिल कोर्सेज को खत्म किया गया है. इसे एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

विदेशी भाषा की पढ़ाई होगी शामिल

‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत विद्यार्थी 6-8 ग्रेड के दौरान किसी समय ‘भारत की भाषाओं’ पर एक दिलचस्प एक्टिविटी में भाग लेना होगा. कोरियाई, थाई, फ्रेंच, जर्मन, स्पैनिश, पुर्तगाली, रूसी भाषाओं को माध्यमिक स्तर पर पेश करने की भी तैयारी की जा रही है.


Spread the News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *