Prayagraj:ललिता माता मंदिर जहां गिरा था सती का पंजा, पांडव ने किया था विश्राम

Prayagraj. प्रयागराज शहर के  बीचों बीच  दुर्गा के एक रूप माँ ललित का एक धाम  है।  पुराणों के अनुसार 88 हजार ऋषियों की तपोस्थलीमें स्थपित आदिशक्तित्रिपुर सुंदरी जगत जननी ललिता माता का मंदिर एक सौ आठ शक्तिपीठों में माना जाता है। यही कारण है कि अमावस्या एवं नवरात्रि के अलावा आम दिनों में भी हजारों श्रद्धालु दर्शन-पूजन करने आते हैं।  इस आदि शक्ति पीठ का वर्णन देवी पुराण से मिलता है।

Maa Lalita Devi Shakti Peeth Allahabad | Shri Mathura Ji

इसके अनुसार पिता दक्ष से मिले अपमान से आहत होकर जब दक्ष पुत्री ने अपने प्राण उत्सर्ग कर दिये तो सती के वियोग में भगवान शिव ने तांडव शुरू कर दिये। यह देख भगवान विष्णु ने बाण से सती के शव के 51  भाग कर दिये। सती के शव के अंश जहां गिरे वहीं शक्तिपीठ की स्थापना हो गई। यहां पर सती का धाहिने  हाथ का पंजा गिरा था। भगवान शंकर को हृदय में धारण करने वाली सती नैमिष में लिंगाधारिणी नाम  से विख्यात हुईं। बाद में इन्हें ललिता देवी के नाम से जाना जाने लगा।

kumbh mela 2019 lalita devi shakti peeth at prayagraj - कुंभ 2019: प्रयागराज  में शक्तिपीठ के भी करें दर्शन, जहां गिरी थी सती की अंगुलियां | religious  blog

ललित देवी धाम 51 शक्ति पीठो मे से एक पीठ

ललित देवी धाम 51 शक्ति पीठो मे से एक पीठ है। इस पूरे शक्ति पीठ मे कुल 5 मन्दिर स्तिथ है। सब से आगे भोले नाथ का  मन्दिर है। हनुमान जी का एक मन्दिर। फिर राम जी का मंदिर और  राम मन्दिर के बगल माँ ललिता का शक्तिपीठ मौजूद है। इस शक्तिपीठ की कुल लम्बाई  108 फीट की है। मन्दिर के अन्दर देवी के ललित रूप की एक मूर्ति मौजूद है। यह भगवती के 51 शक्तिपीठो में से एक है।

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मन्दिर के अन्दर एक पीपल का पेड़ है। इसी पेड़ के नीचे पांडवो ने विश्राम किया था। यही पर पांडव कूप है जहा पांडवो ने पूजा की थी और जल पिया था। आज भी उस कुए को पांडव कूप के नाम से  जाना  जाता है। मन्दिर परिसर के अन्दर एक पीपल का पेड़ भी मौजूद  है जहां अपनी  मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त पेड़ के चारो तरफ़ धागा बांधते है।

Navratri: 51 शक्तिपीठों में से एक है मां ललिता देवी मंदिर, यहीं गिरा था मां  सती का हस्‍तांगुल... पांडवों ने किया था विश्राम - navratri maa lalita devi  temple is one of

इस धाम का वर्णन द्वापर युग मे भी मिलता है। जब पांडव लाक्षा गृह से बच के निकल थे तो वह इलाहाबाद के इसी धाम मे ही उन्हों ने एक रात विश्राम किया था और इसी जगह पे देवी ललिता की अस्तुति की थी। आज भी यहाँ वह पांडव कुंड मौजूद है जहा रातभर पांडव रुके थे। और इसी कुंड के पानी से उन्होंने स्नान किया था।

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