पर्यावरण और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद हरियाली पर चला आरा

पर्यावरण और सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बावजूद हरियाली पर चला आरा

पर्यावरण और सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बावजूद हरियाली पर चला आरा

लखनऊ : पर्यावरण और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करते हुए हरियाली पर धड़ल्ले से आरा चलाया जा रहा है. लखनऊ के माल क्षेत्र में यह अवैध कटान किसी ठेकेदार द्वारा नहीं बल्कि कई धर्मकांटा और कई ट्रकों के मालिक द्वारा पुलिस की मदद से चलाया जा रहा है. मामले पर वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कोई परमिट नहीं जारी हुआ है.

दो लाख 70 हजार में खरीदी थी दो बीघा कलमी आम की बाग

थाने से मात्र तीन किमी की दूरी पर स्थित सालेहनगर पंचायत के मजरे नौबस्ता गांव निवासी कमलेश रैदास की लगभग दो बीघा कलमी आम की बाग है, जिसे हरदोई जनपद के अतरौली थाना क्षेत्र के छतिहा गांव निवासी रजनीश सिंह ने दो लाख सत्तर हजार में खरीदा है. जिसका न तो कोई परमिट है और न ही कोई परमीशन. बाग बीते तीन दिनों से धराशायी किया जा रहा है जहां पुलिसकर्मियों को भी आते-जाते देखे जा रहे हैं. लकड़ी कटाई कर रहे एक मजदूरों ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि ‘पुलिस को 30 से 35 परसेंट जो पड़ता है वह तो भैया ने दे दिया है.’

वहीँ दूसरी तरफ वन विभाग मलिहाबाद के रेंज अधिकारी विकास सक्सेना से परमिट को लेकर पूछा गया तो उन्होंने किसी भी तरह का परमिट जारी होने से साफ तौर पर इनकार किया. उन्होंने कहा कि ‘इसे हम देखेंगे’. लकड़ी कटान करने वाले शख्स के माल इलाके में ही दो धर्मकांटे हैं जहां से प्रति दिन सीतापुर जनपद के लिए लकड़ी के ट्रक लोड होते हैं. एक धर्म कांटा बरगदिया हरदोई बार्डर पर स्थित है और दूसरा धर्मकांटा माल के कुराखर में माल-इटौंजा मेन रोड़ पर क्षत्रिय धर्मकांटा नाम से मौजूद है. जहां सैकड़ों कुंटल आम, नीम,
सागौन, शीशम आदि की वेशकीमती लकड़ी किसी भी समय देखी जा सकती है. उच्चतम न्यायलय के निर्देशों के डर से छोटे ठेकेदार और आरा मशीनों के संचालक कटान बन्द कर चुके है.

पुलिस की साठ-गांठ से आमदनी बढ़ाने में लगे धर्मकांटा संचालक

लेकिन अब स्वयं धर्मकांटा संचालक, पुलिस की साठ-गांठ से कटान कराकर आमदनी बढ़ाने में लगे हैं. उधर आरा मशीनों पर पाबंदी का भी इन्हें पूरा फायदा मिल रहा है. क्षेत्र में अवैध कटान भी रातोरात किया जाता है और बचे-कुचे पेड़ों को जेसीबी से रात ही में उखाड़कर बाग का नामोनिशान मिटाया जा रहा है. लेकिन इन सब से इतर शासन प्रशासन बेखबर है. इस सम्बंध में डीएफओ लखनऊ आरके सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ‘मुझे याद नहीं है कि परमिट है या नहीं यदि बिना परमिट कटान किया जा रहा है तो कड़ी कार्यवाही की जाएगी’. इस सम्बंध में माल इंस्पेक्टर से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यहां पर इस तरह के काम चला करते हैं. मुझे जानकारी ही नही हो पाती है. मैं कोर्ट में हूं अभी पुलिस भेज रहा हूं.

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