फ्रांस ने लिया इस्लामिक कट्टरपंथियों पर का बड़ा एक्शन, मस्जिद पर लगाया ताला

फ्रांस ने लिया इस्लामिक कट्टरपंथियों पर का बड़ा एक्शन, मस्जिद पर लगाया ताला

फ्रांस ने लिया इस्लामिक कट्टरपंथियों पर का बड़ा एक्शन, मस्जिद पर लगाया ताला

पेरिस: फ्रांस की राजधानी में पेरिस इतिहास के अध्यापक का सिर कलम किए जाने की घटना के बाद फ्रांस की सरकार ने इस्लामिक संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पैरिस के उपनगर में स्थित एक मस्जिद को बंद करने का फैसला किया गया है। फ्रांस के गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक इस मस्जिद को 6 महीनों के लिए बंद किया जाएगा। बीते शुक्रवार को 47 वर्षीय अध्यापक ने बच्चों को पढ़ाते समय पैगंबर मुहम्मद का कैरिकेचर दिखाया था। इसी कारण गला काटकर उनकी हत्या कर दी गई थी।

हत्या से पहले मस्जिद फेसबुक पेज पर साझा किया था वीडियो

पेरिस के उत्तर-पूर्वी बाहरी इलाके वाले उपनगर पेंटिन की मस्जिद ने अपने फेसबुक पेज पर हमले से पहले एक वीडियो साझा किया था, जिससे सैमुअल पैटी के खिलाफ नफरत फैली थी। सीन-सेंट-डेनिस विभाग के प्रमुख द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि छह महीने तक इसे बंद करने का निर्णय आतंकवादी कृत्यों को रोकने के लिए लिया गया है।

सैमुअल पैटी मिलेगा फ्रांस का सर्वोच्च सम्मान

राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो ने कट्टरपंथी इस्लामवादियों का मुकाबला करने के लिए काम कर रहे क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ एक बैठक में कहा कि अन्य संगठनों और व्यक्तियों भी हमारे रडार पर हैं। सरकार की तरफ से कहा गया है कि सैमुअल पैटी को मरणोपरांत फ्रांस के सर्वोच्च सम्मान ‘लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया जाएगा।

50 संगठनों सरकार के निशाने पर

वहीं, गृह मंत्री जेराल्ड डरमेनिन ने कहा कि सोशल मीडिया पर घृणास्पद पोस्ट करने वाले 50 संगठनों के लोग सरकार के निशाने पर हैं। इनके ऑनलाइन पोस्ट से संबंधित 80 मामलों में जांच शुरू कर दी गई हैं। दो लोगों ने पैटी के खिलाफ फतवा जारी कर कार्रवाई की मांग की थी। इन सहित कई अन्य मामलों में पुलिस कार्रवाई कर रही है।

अब तक 16 लोगों को किया जा चूका है गिरफ्तार

पैटी की हत्या के मामले में अभी तक परिवार के सदस्यों समेत 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के रडार पर वे लोग भी हैं जिन्होंने पैटी के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चलाया था। इन लोगों ने पैटी द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पढ़ाई कराते समय पैगंबर मुहम्मद का कार्टून दिखाए जाने को गलत माना था।

 

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