अमेरिका की नौकरी छोड़ किसानों के क्षेत्र में रखा कदम, जानिए कैसे हो रहा है मुनाफा

अमेरिका की नौकरी छोड़ किसानों के क्षेत्र में रखा कदम, जानिए कैसे हो रहा है मुनाफा

अमेरिका की नौकरी छोड़ किसानों के क्षेत्र में रखा कदम, जानिए कैसे हो रहा है मुनाफा

नई दिल्ली : दिल्ली में आइआइटी की पढाई पूरी करने के इंजिनियर अनु मीणा ने अपने दादा का सपना पूरा करने के लिए अमेरिका की नौकरी को छोड़ दिया. साल 2016 में आईआईटी पास-आउट छात्रा ने किसानों को मुनाफा दिलाने के लिए एक ऐसा अभियान शुरू किया है जो न केवल उनकी फसल का उचित दाम दिलाएगा बल्कि खेती के समय आने वाली सभी समस्याओं को कम करने में भी मदद करेगा.

किसानों को दिला रहीं हैं अच्छा मुनाफा

अनु ने साल 2017 में किसानों के लिए एक ऐसी कंपनी की नींव रखी जो किसानों से सीधा फसल खरीद कर ग्राहकों को दे और किसानों को अच्छा मुनाफा दिलाएं. उनके इस अभियान के चलते उन्हें साल 2018 में फोर्ब्स मैगजीन द्वारा अंडर 30 एशिया अवार्ड, साल 2019 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय व ग्लोबल गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

अनु बताती हैं उनके दादा फसल बेचने को लेकर और उसके उचित दाम न मिलने को लेकर परेशान रहते थे, और ये सिर्फ उनके दादा की समस्या नहीं थी, देश में ज्यादातर किसान इसी समस्या का सामना कर रहे हैं. आज किसानों को उचित मुनाफा दिलवाकर वो अपने दादा के सपने को पूरा कर रही हैं. इसके साथ ही वो किसानों को उनकी फसल को लेकर जागरूक करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों में आयोजन भी कराती हैं.

गांव-गांव जाकर सुनती हैं किसानों की समस्याएं

अनु बताती है कि हर किसान की अपनी अलग समस्या होती है. किसी को अपने उत्पाद की पैकिंग में समस्या आती है तो किसी की उसे दूसरे जिलों में बेचने में. इसके लिए वो खुद गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याएं सुनती हैं और किसानों की फसल बिकवाने से लेकर, उसकी पैकिंग, एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में भेजने के लिए परिवहन आदि की भी व्यवस्था कर किसानों की समस्याएं सुलाझाती हैं.

वे बताती हैं कि उनकी कंपनी दो तरीके से काम करती है. पहला किसानों को ग्राहको को बेचने के लिए. दूसरा ग्राहकों को किसानो से खरीदने के लिए. इसके लिए उन्होंने तकनीक का सहारा लेकर किसानों के लिए एप भी बनाया है. जिन किसानों को तकनीक का ज्ञान नहीं है उनकी फसल बिकवाने के लिए अनु ने हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में कुल 50 सहायता केंद्र बनाएं हैं. जहां पर जाकर भी किसान अपनी फसल को बेचने या अन्य कोई जानकारी दे सकते हैं.

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